गली बॉयः अभी कुछ और ‘गैर अभिजात्य’ कहानियां कही जानी बाकी हैं…

सिनेमा के पर्दे पर निम्न मध्यवर्ग की कहानियां बहुत कम कही गई थीं। पिछले कुछ सालों में आई फिल्मों में इस दुनिया की कहानियां अपने पूरे रंग और अहसास के साथ आई हैं। '

पटाखाः इसी लाउडनेस में इसका सौंदर्यबोध है

'पटाखा' जैसी फिल्में ज्यादा बननी चाहिए। इसलिए नहीं कि यह बहुत कलात्मक फिल्म है या इसमें कोई महान संदेश है। सिर्फ इसलिए कि यह मौलिक है। यह एक ठेठ देसी कलेवर वाली भारतीय फिल्म...

इसके ‘बल’ में बल कुछ ज़्यादा हुआ ठैरा तो क्या, पिक्चर तो भल ठैरी...

देश के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की पृष्ठभूमि में रचा गया विषय तथा कथासूत्र होने के बावजूद  राज्य से ताल्लुक़ रखने वाले तथा मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री में कार्यरत ढेरों उम्दा अभिनेताओं-अभिनेत्रियों में...

‘मनमर्जियां’ अनुराग कश्यप की फिल्म नहीं

'मनमर्जियां' अनुराग कश्यप की फिल्म नहीं है। इस फिल्म में अनुराग कश्यप सिरे से गायब हैं। सिर्फ गाहे-बगाहे बिना किसी रचनात्मक संदर्भ के दो लड़कियां फ्रेम में कूदकर आ जाए तो भले आपको 'देव डी'...

वन्स अगेनः पूरे वक्त प्रेम को बुनती एक फिल्म

वो खट से फोन रखती थी....... तारा. वो फोन पर दूसरी तरफ आंखे मींचे टूँ-टूँ-टूँ सुनता था........ अमर. तारा हर बार जब यूं फोन रखती है तब बुरा सा क्यों लगता है? हर कॉल पर...

पलटनः बॉर्डर न सही, जेपी दत्ता तो हैं

किसी भी क्षेत्र में एक बार कालजयी, बहुप्रशंसित और अत्यधिक सफल मुक़ाम का स्पर्श कर लेना कई नई चुनौतियों को जन्म देते हुए आगे की राह कठिन बना देता है. यह बड़ी सफलताओं से...
अनारकली ऑफ आरा

अनारकली ऑफ आराः जब नाचना-गाना एक प्रतिरोध में बदल जाता है

अनारकली आफ आरा' का क्लाइमेक्स देखकर आपको कुछ याद आ सकता है। इसको समझने के लिए यह जरूरी है कि आपके सामने काले, बदरंग अतीत वाला एक सफेदपोश बैठा हो। उसके साथ...
Dear Zindagi Movie

डियर जिंदगी : इस कांप्लीकेटेड लड़की को जानते हैं आप?

यह फिल्म एक सीधा-सादा सा मैसेज देती है कि वो तमाम लोग जो ज़िंदगी को सहज तरीके से, अपनी पूरी संवेदनाओं के साथ जीना और महसूस करना चाहते हैं, हमारी सोसाइटी उन्हें...

पार्च्ड – फिल्म फेस्टिवल्स के लिए ‘फास्टफूड फेमिनिज़्म’

अगर फिल्म निर्देशक मनमोहन देसाई न होते तो शायद चालू फिल्में, मसाला फिल्म, बंबइया सिनेमा जैसे शब्दों से हम अपरिचित ही रह जाते। वे इस बात को बिना झिझक स्वीकारते थे कि उनकी फिल्में...

एंग्री बर्ड्स की पॉलीटिक्स क्या है?

एंग्री बर्ड्स बच्चों की मासूम फिल्म नहीं है। यह एक पॉलिटिकल फिल्म है। या कहें तो यह एनीमल फॉर्म की तरह एक बेहद स्पष्ट पॉलिटिकल एलेगरी है। जो सीधे-सीधे यूरोपीय देशों में शरणार्थियों की...