हँसाने के साथ नश्तर सा चुभो जाती है ‘आंखों देखी’

फिल्‍म के एक सीन से ही शुरू करते हैं। बाबू जी (संजय मिश्रा) अपनी बेटी की शादी का कॉर्ड छपवाने के लिए जाते हैं। बाबू जी कुछ दिनों पहले ही यह फैसला ले चुके...

कैसे बनी विजयदान देथा की कहानी पर फिल्म ‘लाजवंती’

विजयदान देथा की कहानियां हमेशा से फिल्म निर्देशकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही हैं। चाहे मणि कौल की ‘दुविधा’ हो, प्रकाश झा की ‘परिणति’, अमोल पालेकर की ‘पहेली’ हो या फिर उदय प्रकाश...