गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है

पिछले दिनों लंबी रेल यात्राओं के दौरान बहुत सी फिल्मी छवियां मन में कौंध गईं। भारतीय फिल्मों का तो रेलगाड़ी से गहरा रिश्ता रहा है। जरा सुपरहिट फिल्म 'शोले' का पहला सीन याद करिए।...

हमारा बॉलीवुड थर्ड जेंडर को कैसे देखता है?

शायद एक वक्त आएगा जब लोग आश्चर्य करेंगे कि किसी पुरुष के स्त्रियों जैसे व्यवहार को लंबे समय तक भारतीय सिनेमा में मजाक का विषय माना जाता रहा है। हिन्दी सिनेमा इस मामले में...

जब नायक से बड़ा बन जाता है किसी फिल्म का सपोर्टिंग एक्टर

जब आप 'जय गंगाजल' देखकर निकलते हैं तो देर तक आपके जेहन में डीसीपी बीएन सिंह घूमता रहेगा। इस किरदार के जरिए प्रकाश झा पहली बार स्क्रीन पर आए हैं और अन्य निर्देशकों के...

सोशल मीडिया पर ‘अनायकों’ की महागाथाएं

काफ्का की कहानी ‘मेटामार्फोसिस’ का बेहद मामूली जिंदगी जीने वाला नायक एक सुबह जागता है और खुद को तिलचट्टे में बदला हुआ पाता है। मगर 2011 की एक सुबह इलाहाबाद के गोविंद तिवारी की...

पोलर एक्सप्रेसः भविष्य का सिनेमा

चार साल पहले क्रिसमस के मौके पर सारी दुनिया में रिलीज की गई दुनिया की पहली 'आल डिजिटल कैप्चर फिल्म' पोलर एक्सप्रेस को इस क्रिसमस पर याद किया जाना चाहिए। इसलिए भी शायद यह...