मेड इन इंडिया…

कहीं से एक लहर उठी और सारी दुनिया झूमने लगी. बीते दो दशकों में सबसे बड़ा कल्चरल चेंज इंडियन पॉपुलर म्यूजिक में देखने को मिलता है. इंडिया ने वेस्टर्न म्यूजिक को एक खास स्टाइल...

जोगिंदर की स्मृति में

‘रंगा खुश’ जोगिंदर इस दुनिया में नहीं रहा। यह खबर मुझे देर से मिली और जब आज शाम को एक मित्र से बातों-बातों में पता लगा तो इस पर पोस्ट लिखने से खुद को...

मन का रेडियो

आजकल पुराने दिनों को याद करना एक फैशन सा हो चला है। बहुत पुराने नहीं- यानी रिसेंट पास्ट। फिल्में भी कुछ इसी अंदाज में बन रहीं हैं, वे सत्तर या साठ के दशक में...

वो जमाना ‘थ्रिलर्स’ का!

हिन्दी सिनेमा ने थ्रिलर की अपनी एक दिलचस्प स्टाइल डेवलप की थी, जो अचानक खत्म हो गई। अगर गौर करें तो सत्तर-अस्सी का दशक का हिन्दी सिनेमा इन थ्रिलर फिल्मों के लिहाज से बहुत...

एक थी लड़की, नाम था नाज़िया

यह भारत में हिन्दी पॉप के कदम रखने से पहले का वक्त था, यह एआर रहमान के जादुई प्रयोगों से पहले का वक्त था, अस्सी के दशक में एक खनकती किशोर आवाज ने जैसे...

बारिश में भीगता हुआ पोस्टर

अगर सिनेमा को याद करूं तो मैं उन तमाम पोस्टरों को नहीं भूल सकता, जिन्होंने सही मायनों में इस माध्यम के प्रति मेरे मन में गहरी उत्सुकता को जन्म दिया। जबसे मैंने थोड़ा होश...

नष्ट होती धरोहर

मेरे लिए यह खबर एक शॉक की तरह थी कि आज की तारीख में भारत की पहली बोलती फिल्म आलमआरा का कोई प्रिंट मौजूद नहीं है। यह देश और समाज की धरोहर के प्रति...

डॉयलॉग, डॉयलॉग और डॉयलॉग..

"माँ, मै फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास हो गया हूँ" "माँ तुम कितनी अच्छी हो" "भैया!" "आज पिंकी का जन्म-दिन है""मैने इस ज़मीन को अपने खून से सींचा है... " "वो एक गन्दी नाली का कीडा है" "कुत्ते! कमीने! ....." "इसे...

हॉरर फिल्में: भीतर छिपे भय की खोज

कभी लगातार प्रयोगों से बॉलीवुड सिनेमा को एक नया रास्ता दिखाने वाले राम गोपाल वर्मा ने शायद अब अपने लिए दो सुरक्षित जोन तलाश लिए हैं, अंडरवर्ल्ड और हॉरर। लंबे समय से इन्हीं दो...

छोटी सी बात मुहब्बत की…

घर लौटते वक्त, कभी कोई काम करते समय या अनायास सड़क से गुजरते हुए... न जाने कितने सालों से यह गीत मैं गुनगुना उठता हूं. बहुत सादा से शब्दों वाले इस प्रेम गीत का...